बेतिया (बिहार): बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी रह चुके दिलीप कुमार को बेतिया की एसडीजेएम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके खिलाफ जमानतीय गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए उन्हें आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। दिलीप कुमार इस समय पंजाब सरकार में एनआरआई विभाग के प्रधान सचिव के पद पर तैनात हैं।
कोर्ट ने धारा 205 के तहत राहत देने से किया इनकार
अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी (एसडीजेएम) शशांक शेखर की अदालत ने दिलीप कुमार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 205 के तहत निजी उपस्थिति से छूट की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियुक्त लंबे समय से अदालत की प्रक्रिया से बचते रहे हैं, इसलिए अब उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।
बार-बार याचिका दाखिल करने पर अदालत की नाराजगी
न्यायालय ने अभियुक्त द्वारा बार-बार छूट की याचिकाएं दायर किए जाने पर नाराजगी जताई और साफ कहा कि अब कोई भी राहत नहीं दी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई की तारीख 6 मई 2025 निर्धारित की गई है।
2008 के मामले से जुड़ा है विवाद
यह पूरा मामला वर्ष 2008 में बेतिया में आयोजित एक शांति समिति की बैठक से जुड़ा है। आरोप है कि तत्कालीन डीएम दिलीप कुमार ने बैठक में मौजूद अधिवक्ता ब्रजराज श्रीवास्तव और योग भारती के राष्ट्रीय निदेशक विजय कश्यप के साथ दुव्यवहार, गाली-गलौज और मारपीट की थी। इसके बाद दोनों को कथित रूप से हथकड़ी लगाकर नगर थाना में बंद कर दिया गया और रात को पुलिस द्वारा पिटाई कर जेल भेजा गया।
केस की पृष्ठभूमि
इस घटना को लेकर वर्ष 2008 में अधिवक्ता ब्रजराज श्रीवास्तव ने बेतिया व्यवहार न्यायालय में परिवाद संख्या 2260/2008 दायर की थी। जांच के बाद अदालत ने दिलीप कुमार के खिलाफ कई धाराओं में संज्ञान लिया और उन्हें अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया। लेकिन बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद दिलीप कुमार पेश नहीं हुए।
उच्च पदस्थ होने का दिया था हवाला
दिलीप कुमार ने 20 सितंबर 2024 को एक याचिका दायर कर अदालत से कहा था कि वे सरकारी कार्यों में अत्यधिक व्यस्त हैं, इसलिए उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जाए और उनके वकील को ही पेश होने की अनुमति दी जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता की बहस के बावजूद कोर्ट ने यह तर्क अस्वीकार कर दिया।